Tuesday, 31 July 2018

रोशनी

उषा की लालिमा जब आकाश पर छा जाती है
अँधकार की हार से हमारी हिम्मत बढ़ाती है
नई राहो पर चलने की सिख सिखलाती है
चलते रहना ही जिदंगी है रूकना तो मौत की निशानी है।

सूरज की किरणे जब धरती पर आ जाती है
नई उमंगो का संचार कर सब को बतलाती है
उठ मंजिल की तलाश कर पिछे मुड़ना नादानी है
चलते रहना ही................!

दिन के उजाले मे हर चीज साफ नजर आ जाती है
ठोकर खाकर भी ना संभले ये कैसी नादानी है
हर मुश्किल का हल है फिर क्यूं हार मानी है
चलते रहना ही...................!

संध्याकाल की रोशनी भी अजब रंग दिखलाती है
अपनी मंद-मंद रोशनी से हम सबको समझाती है
नए सपनो को जन्म दें कल उनको दिशा दिखानी है
चलते रहना ही.....................! 



मेरी पहली कविता

                प्यार का सन्देश

 प्यार का सन्देश दें सबको बतलाये हम
 जीवन अनमोल है खुशियों से बिताए हम
 नफरत की दिवार गिरा सबको गले लगाए हम
 आओ अबकी बार ऐसी दिवाली मनाए हम।

फूलो की कलियों से ऐसी सुगंध फैलाए हम
अपना ही नही सबका घर आँगन महकाए हम
दुरियां रहे ना दिलो मे ऐसे सब मिलजाए हम
आओ अबकी ....................!

जगमग हो धरती अंबर ऐसे दीप जलाए हम
मिट जाए सारा अंधियारा ऐसी जोत जगाए हम
दु:ख के साये से कोसो दूर आ जाए हम
आओ अबकी....................!

पटाखों को भूल मिठाईयों से दिल बहलाए हम
गरीब की कुटियों मे भी ऐसी मिठास दे पाए हम  ऐसा करे कि सबकी खुशियो को पूरा कर पाए हम
आओ अबकी....................!

रक्षक है जो हम सब के उनको ना भूल जाए हम
पहरा देते जो रातों को जिससे चैन से सो पाए हम
एेसे वीरों के नाम का भी एक दीप जलाए हम
आओ अबकी.....................!