उषा की लालिमा जब आकाश पर छा जाती है
अँधकार की हार से हमारी हिम्मत बढ़ाती है
नई राहो पर चलने की सिख सिखलाती है
चलते रहना ही जिदंगी है रूकना तो मौत की निशानी है।
सूरज की किरणे जब धरती पर आ जाती है
नई उमंगो का संचार कर सब को बतलाती है
उठ मंजिल की तलाश कर पिछे मुड़ना नादानी है
चलते रहना ही................!
दिन के उजाले मे हर चीज साफ नजर आ जाती है
ठोकर खाकर भी ना संभले ये कैसी नादानी है
हर मुश्किल का हल है फिर क्यूं हार मानी है
चलते रहना ही...................!
संध्याकाल की रोशनी भी अजब रंग दिखलाती है
अपनी मंद-मंद रोशनी से हम सबको समझाती है
नए सपनो को जन्म दें कल उनको दिशा दिखानी है
चलते रहना ही.....................!